Sunday, 26 January 2020

मॉं ने औरत को स्वार्थी बना दिया

ना सर्दी ने कभी उसे सिकुड़ा था,
ना ही गर्मी में हताश हुई,
पानी बरसा कितना भी,
चाहे वो बीमार हुई,
मुस्कुराती रहती थी,
सुबह की जल्दी - रात की देरी,
कभी उसे नहीं सताती थी,
पर ये क्या,,, आज उसे मैंने,
हाथ नम करते देखा है,
काम करते हुए पहली बार चिड चिड़ाते देखा है,
खाना बनाने की जल्दी में देखा है।
औरत, मां बनते ही बदल गई,
लगता है कमज़ोर हुई।
हां। अब समझी, ममता ने उसे झुका दिया,
या ऐसा कहूं बहुत कुछ सीखा दिया,
मेरी नन्ही सी जान को सर्दी ना पकड़े,
तो उसे पकड़ने वाले हाथों को मां ने नम किया,
मेरे बच्चे की एक आह! ने मां को काम के प्रति ,
चीड़ चिडा बना दिया,
मेरी जान की आंख से आंसू गिरने से पहली ,
मां ने खाना हड़ बड़ी में बना दिया।
ममता ने औरत को मां बना दिया,
औरत जो सबके लिए करती थी,
मां को थोड़ा स्वार्थी बना दिया,
ममता ने उसे खुद के लिए,
समय निकालना सीखा दिया,
उस खुद के लिए जिसमें वो खुद को जीती है,
ममता ने मां को स्वार्थी बना दिए,
मां को आईना निहारना छुडा दिया।।

चारूलता