Thursday, 24 September 2020

तू तो एक प्राणी मात्र है


किस छल-कपट से जी दुखाता है,

किस झूठ से आंखे नम है,

किस छलावे से भारी-भारी मन है,

तू तो सिर्फ एक प्राणी मात्र है।।

जो पेड़ छाया-सुख देता है,

जिसका फल स्वाद-आनंद दिलाता है,

जिसकी डाल पे सखी-संग झूला,

जीवन मरुथल चाशनी सा गोते लगाता है,

इंसान उसे बेझिझक काट देता है,

फिर तू तो एक प्राणी मात्र है।।

जो धरती बोझ उठाती है,

सीना चीर अन्न दान देती है,

जो सबको थामे रखती है,

माँ कहता है फिर भी,

इंसान बेझिझक थूक देता है,

फिर तू तो एक प्राणी मात्र है।।

जो शक्ति है,

सम्पूर्ण जगत की पालन-कर्ता है,

रूप अनेक पर अर्थ तो एक है,

इंसान बेझिझक जब उसे ही, 

नकारता है,

होनी को अनदेखा कर, पाप कर,

इंसान बेझिझक खुद को धोका देता है,

फिर तू तो एक प्राणी मात्र है,

तू तो एक प्राणी मात्र ही है।।।

रुक जा, संभल जा,

खुद को बदलने मत दे,

मुस्कुरा, सही राह चुनता जा,

ईश्वर तेरे संग है,

तू तो कहता है,

तू एक प्राणी मात्र है,

पर प्रभू के लिए तू प्रेम-पात्र,

संतान-मात्र है।।।


चारुलता

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