Friday, 3 February 2017

Maa meri Duniya

Maa meri duniya hi kuch aur hai,
Mera nazariya hi alag hai,
Nahi Maa mein jhootha nahi chodhta,
Pr tujhe pakate hi dekhta hu,
Khate nahi,
Maa meri duniya hi kuch aur hai,
Maa mera nazariya hi alag hai,
Nahi Maa mein itraata nahi,
Pr tujhe kam krta hi dekhta hu,
Muskuraata nahi,
Maa meri duniya hi kuch aur hai,
Nahi mein zidd nahi krta,
Tujhe thakta dekhta hun,
Aaraam krta nahi,
Mera nazariya hi alag hai,
Nahi Maa mein badmaashi nahi krta,
Tujhe khilaate hi dekhta hun,
Khelte nahi,
Maa meri duniya hi kuch aur hai,
Nahi Maa mein naaraaz nahi hota,
Par tujhe sabka krte dekhta hun ,
Apne khud ke liye nahi,
Meri shataani teri hasi ke liye hai,
Meri zid tere aaraam ke liye hai,
Mein iss duniya mai,
tujhe bachpan jeevane aaya hun,
Gussa naa kr,
Mere sath khush ho,
Mere sath jee,
Mere sath naya nazariya sikh,
Meri duniya hi kuch aur hai Maa,
Mera nazariya hi alag hai....
Love u Maa
CharuLata

Thursday, 11 August 2016

भगवान भी ग़ज़ब करते है.....

भगवान भी ग़ज़ब करते है,
औरतों को दिल क्यों दिया करतेवरहै,
भर जाते है ज़ख़्म, कितने भी गहरे सही,
दिल की चोटें लिए फिरते है,
औरतों को दिल क्यों दिया करते है।।।
सोच के लिए आसमा नहीं,
ज़ुबान के लिए स्वाद नहीं,
नज़रों के लिए नाज़रियां नहीं,
महसूस करना पर जीना नहीं,
भगवान भी ग़ज़ब करते है,
औरतों को दिल क्यों दिया करते है।।।
जीवन यहाँ, पर बढ़ो किसी के लिए,
चाहत जानो, किसी और के लिए,
खुद को पहचानों, उनके लिए,
चलते जाओ, साथ देने के लिए,
रोना नहीं, हंसना सीखो,
उनके लिए सब कुछ सीखो,
भगवान भी ग़ज़ब करते है,
औरत को दिल क्यों दिया करते है,
दिल को निकाल कर देते एक machine fit,
Feed करते उसमे उनकी सारी need,
रहता खुश ये संसार सारा,
चलता वो रोबोट तो, कम से कम जीवन सारा।।।
भगवान भी ग़ज़ब करते है,
ज़रूरत है robot की,
फिर भी औरत को उसके दिल के साथ,
धरती पे भेज दिया करते है।।।

चारुलता

Wednesday, 29 June 2016

ये वो जगह हैं

 ये वो जगह है अब जहाँ,
पानी को रोज़ बहाते है और,
Mineral water महेंगा खरीदते के लाते है।
ताज़े फल ना सही,
Mixed fruit jam ही चख लेते है।
पेड़ काटते है सड़क के लिए तो,
Air purifier घर लाते है।
पंछियों के घोसले उजाड़ते है पर,
Door bell ची ची वाली लगते है।
मम्मी-पप्पा घर मे अकेले सही और,
Facebook पे mothers- fathers day,
के video देख like thokte है।
ये वो जगह है अब जहाँ,
चेहरे पे कितनी धुल चडी हुई पर,
आईने तो colin से चमचमाता है।।

चारुलता

Tuesday, 28 June 2016

इतना तो रहम कर

किसी से इतनी नसफरत ना कर ऐ दोस्त,
की वो तेरा ज़हन दबोच ले,
किसी को इतना प्यार भी ना कर,
की वो तेरी ख्वाइशें चुरा लें।
करना है तो इतना कर खुद पे रहम,
खुदही से प्यार कर,
और ग़लती ना दोहराने पर,
खुदही को माफ़ कर,
जब विश्वास करके खुदही,
को समझा लेगा, अच्छा व्यवहार करेगा,
तो समन्दर कितना ही नमकीन सही,
रोगों को तो दूर करेगा।

चारुलता

Tuesday, 21 June 2016

तू ही तू

कुछ ऐसा देखा की अरसों,
से उम्मीद ही छोड़ दी,
जाने क्यों तुमसे मिलके लगा,
की हवा में नमी अभी बाकी है,
नहीं तो पानी भी सूखा,
जान पढता था।
जो अब कभी बेवक़्त कही हूँ,
तो हर झोका तुम्हारी आहात लगती,
जो श्रृंगार करूँ तो,
आईना तुम्हारी झलक देता है,
जो कभी अकेले में इतराउं,
तो हर झरोखा तुम्हारी नज़र,
सा पहचान पढता है।
इतना प्यार, ऐसा एहसास,
तुमने ही तो जगाया है,
अब अगर मैं भीग रही हूँ,
तो मेरी क्या खता है,
अब अगर मैं डूब रही हूँ,
तो मुझे क्या परवाह है।
तुझे नहीं बहने दूंगी ये,
ही मेरा वादा है।
आ फिर मुझे संभाल ले,
आ फिर मेरे साथ जी ले।।
चारुलता

Monday, 20 June 2016

Happy birthday MUMMY

मैं कुछ अलग ही महसूस करती हूँ,
ख़ुशी भी बहुत होती है,
जो जननी है उसे जन्मदिन की बधाइयाँ देती हूँ,
खुश रहे वो ,
खिलखिलाती रहे वो,
जिस माटी में सोंधी खुशबूहोती है,
फूल उसी के हमेशा महकते है,
सागर में पानी भरा ही सही,
सींचती तो नदी ही है।।।
इस नदी को,
इस माटी को,
प्रणाम।

जन्मदिन की बधाइयाँ मम्मी।
Love you , टेक केअर

Thursday, 16 June 2016

माँ

अरसा हुआ ये शब्द पुकारा नहीं,
जिसमे सृष्टि समाई है,
बोला सबने ये दुनियाँ,
उसी की सजाई है।
है ये शब्द बड़ा ही मीठा,
इसमें बड़ी गहराई है,
कहने की ये बात नहीं ,
सारी रचनाए इसी से आई है।
पर क्या करूँ,
हुआ अरसा इसे पुकारे,
वो प्यारी लहर ने कभी,
भिगोया नहीं,
उस ठहराव ने कभी थामा नहीं।
शायद इसलिए समय बिता यूँ,
तरसती रही मैं जीवन को यूँ।
जो इसमें अमृत रमाया है,
चखा मैंने इसे कभी नहीं।
जिसे अरसो से पुकारा नहीं,
डरती हूँ उसके लिए भी मैं,
माँ हैं मेरी, जननी हैं वो,
पर क्या करूँ दूर खड़ी है वो,
फूल वहाँ महकते नहीं,
कली वहाँ खिलती नहीं,
अँधेरे में वो रहती है,
भाव को चूर-चूर कर देती है,
रौशनी को आने देती नहीं,
घुटन को जाने देती नहीं।
एक ड़ोर थामे बैठी हूँ,
सब्र को दबोचे बैठी हूँ,
उम्मीद अभी भी छोड़ी नहीं,
शायद पुकारूँ में फिर कभी।......
चारुलता