मेरी बेटी,
अब तू ही बता दे, की ये क्या है,
तू मेरी चाहत है या,
मैं तेरी मर्ज़ी,
तू मुझे खुशी देती है,
या मैं तुझे सुकून।
अब तू ही बता दे, की ये क्या है,
मैंने तुझे जना है, या तूने मुझे बनाया है,
सीख रही हूं मैं, या समझ रही है तू,
तू ही बात, ना रक्खी कोई शर्त,
ना बाँधा मुझेे,
फिर भी रुकी हूँ तेरी ओर,
कोई शिकायत नहीं,
जो तुझे हो, तो बता,
ख्वाइश है तू मेरी,
सांसे तुझसे से ही चलती है।
ये तेरी मर्ज़ी हो या मेरी,
इस चाहत में खोये रहना चाहती हूँ,
इस प्रकृति का धन्यवाद,
कण-कण का धन्यवाद करना चाहती हूँ,
मैं तुझमे खो जाना चाहती हूँ।।।।
कायशा
चारुलता
अब तू ही बता दे, की ये क्या है,
तू मेरी चाहत है या,
मैं तेरी मर्ज़ी,
तू मुझे खुशी देती है,
या मैं तुझे सुकून।
अब तू ही बता दे, की ये क्या है,
मैंने तुझे जना है, या तूने मुझे बनाया है,
सीख रही हूं मैं, या समझ रही है तू,
तू ही बात, ना रक्खी कोई शर्त,
ना बाँधा मुझेे,
फिर भी रुकी हूँ तेरी ओर,
कोई शिकायत नहीं,
जो तुझे हो, तो बता,
ख्वाइश है तू मेरी,
सांसे तुझसे से ही चलती है।
ये तेरी मर्ज़ी हो या मेरी,
इस चाहत में खोये रहना चाहती हूँ,
इस प्रकृति का धन्यवाद,
कण-कण का धन्यवाद करना चाहती हूँ,
मैं तुझमे खो जाना चाहती हूँ।।।।
कायशा
चारुलता
No comments:
Post a Comment