बड़ी जल्दी तुम्हारे नन्हें पैर, मेरी गोद से बाहर भागने लगे,
बड़ी जल्दी मेरा आँचल छोड़, खिलोने, पेंसिल उठाने लगे,
तुम्हारे पीछे भागते-भागते मेरी सांसें फूलने लगी,
जो गोद में उठाया तो मेरी कमर बोलने लगी,
तुम्हे तैयार करते -करते जो आईने से नज़र मिली,
तब जाके सफेद बालों से मेरी मुलाकात हुई,
हकीकत से सामना हुआ तो जाना,
"तुम तो बहुत young दिखती हो"
"बड़ी slim हो, क्या करती हो"
ये सुनते और तुम्हे देखते सब भूल गई थी,
तुम बच्चों की चमत्कारी दुनियाँ में खो गई थी,
तभी तो इतने सालों, महीनों, घंटों को जल्दी कह रही थी,
भई खो-खो हो या कबड्डी, volley-ball हो या फिर
High-jump, सिलाई, बुनाई, painting या drawing,
Cooking, anchoring, interviews, non-stop working,
कभी मैं पीछे हटी नहीं, आज में कैसे बैठ गई,
अपनी उम्र से मैं दोस्ती करने लगी।।।
अब समझी क्यों ज़रा से खटके से बड़ों की डांट,
खाते थे, बेवजह शोर से बड़े क्यों डर जाते थे,
उम्र का लिहाज़ था भैया, उम्र का लिहाज़ है,
औरत हूँ इसलिए औरत के भाव प्रकट करती हूँ,
पिता की बेटी हो या भाई की बहन,
पति की पत्नी हो या बच्चों की माँ,
फिक्र से बेफिक्र कभी हो नहीं पाती,
औरतों की खुद से मुलाकातें तंग,
और खुद की फिक्र हो नहीं पाती।।।
चारुलता
बड़ी जल्दी मेरा आँचल छोड़, खिलोने, पेंसिल उठाने लगे,
तुम्हारे पीछे भागते-भागते मेरी सांसें फूलने लगी,
जो गोद में उठाया तो मेरी कमर बोलने लगी,
तुम्हे तैयार करते -करते जो आईने से नज़र मिली,
तब जाके सफेद बालों से मेरी मुलाकात हुई,
हकीकत से सामना हुआ तो जाना,
"तुम तो बहुत young दिखती हो"
"बड़ी slim हो, क्या करती हो"
ये सुनते और तुम्हे देखते सब भूल गई थी,
तुम बच्चों की चमत्कारी दुनियाँ में खो गई थी,
तभी तो इतने सालों, महीनों, घंटों को जल्दी कह रही थी,
भई खो-खो हो या कबड्डी, volley-ball हो या फिर
High-jump, सिलाई, बुनाई, painting या drawing,
Cooking, anchoring, interviews, non-stop working,
कभी मैं पीछे हटी नहीं, आज में कैसे बैठ गई,
अपनी उम्र से मैं दोस्ती करने लगी।।।
अब समझी क्यों ज़रा से खटके से बड़ों की डांट,
खाते थे, बेवजह शोर से बड़े क्यों डर जाते थे,
उम्र का लिहाज़ था भैया, उम्र का लिहाज़ है,
औरत हूँ इसलिए औरत के भाव प्रकट करती हूँ,
पिता की बेटी हो या भाई की बहन,
पति की पत्नी हो या बच्चों की माँ,
फिक्र से बेफिक्र कभी हो नहीं पाती,
औरतों की खुद से मुलाकातें तंग,
और खुद की फिक्र हो नहीं पाती।।।
चारुलता
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