Saturday, 9 May 2020

लॉकडौन

मेरे एक मित्र ने मुझसे पूछा,
बड़े दिन हुए कुछ लिखा नहीं,
तुमने कुछ नया भेजा नहीं,
लॉकडौन है कुछ तो फायदा उठाओं,
अपनी creativity दिखाओं।
मैंने कहाँ हांजी लॉकडौन है, तभी तो,
Creativity हड़ताल पे है,
मित्र बोलै ऐसे-कैसे,
मैंने कहाँ भाईसाहब ऐसे..
आप बेटे है,पति है एक बार औरत बनकर देखें,
तो जान पाएंगे,की आम दिनों,
का जो timebreak,हम औरतें,
कुछ लिखने,पढ़ने,बनाने,सिलने,
कुछ कसरत,या लंबी सांस लेने में,
इस्तेमाल करती थी,अब वो भी,
मुए कोरोना के कारण छिन गया है,
तुम लंबे लॉकडौन के चलते डर रहे हो,
घरबार औरतें भी रही है सब्ज़ी के बढ़ते दाम देखकर,
तुम घर में बैठे-बैठे bore हो गए हो,
थक औरतें भी गई है बच्चों को घर में खुश,
रखने की तरकीबें सोच कर,
तुम्हे नींद नहीं आती,office जो गए नहीं,
दोस्तों से मिलें नहीं,जाम जो टकराएं नहीं,
हमें नींद आती नहीं,कल किसकी मर्ज़ी का बनाना है,
Homework के साथ Classwork भी तो समझना है,
गर्मी में परिवार को हँसाना है,
और दुखती कमर पर कल ज़रूर बाम लगाना है।
कुछ अच्छे पति साथ देते है,
लेकिन इस मुए कोरोना के कारण,
जो औरतों पे संकट आया है,
श्राप ज़रूर लगेगा,जल्दी भस्म होगा,
औरत की आह में शक्ति बहुत होती है,
एक माँ के क्रोध में अग्नि बहुत होती है।

चारुलता

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