Tuesday, 23 October 2018

माँ

सच माँ बोलने में जितना सुकून मिलता है,
उससे ज़्यादा सुनने में संतुष्टि मिलती है ।
सच्ची माँ शब्द बोलने में जितना प्यार भर जाता है,
सुनने मे उससे बहुत ज़्यादा लाड़ आता है।
माँ को आवाज़ लगाने मे जो बेफिक्री है,
सुनके गोद मे लेना उससे बहुत ज़्यादा बड़ी ज़िम्मेदारी है।
जन्म देके जननी तो फिर भी प्रकृति बनाती है,
लेकिन माँ खुद की गहराइयों से बनते है।
माँ एकाग्रता है,
माँ समर्पण है,
माँ ही ममता है,
माँ ही धैर्य है,
माँ...माँ है,
माँ ही आवाज़ है, माँ ही हृदय है
माँ माँ है।।।

चारुलता

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