मेरे अनमोल रतन,
तुम्हें पाकर दुनियां की सबसे,
रहीस बेहेन हूँ मैं,
मैं बहुत भाग्यशाली खुद को मसूस,
करती हूँ, जब खुद को आपकी बहन,
कहलाती हूँ।
भाई गर्व है तुझपर,
जो जीवन को सरलता से लेता है,
तेरे साथ कोई हो या न हो,
फैसले भी तू विनम्र होकर लेता है।
मेरी विडंबना तू शायद ही समझ पाए,
पर मैं निश्चिंत हूँ,
क्योंकि मेरे बचपन के आंगन को,
खिलाये रखने वाले तुम हो,
पुण्य किया है ज़रूर भारी मैन,
जो भाई तू, और भाभी वो है,
भईया तेरे प्यार की कोई सीमा नहीं,
तो भाभी में अपनेपन की मर्यादा नहीं।
भईया मेरी यादें अधूरी है आपके बिना,
मेरा बचपन खाली है तेरे बिना,
और मेरा आज इतना अच्छा ना होता,
आप दोनो के बिना।
💞 भईया - भाभी
चारुलता
तुम्हें पाकर दुनियां की सबसे,
रहीस बेहेन हूँ मैं,
मैं बहुत भाग्यशाली खुद को मसूस,
करती हूँ, जब खुद को आपकी बहन,
कहलाती हूँ।
भाई गर्व है तुझपर,
जो जीवन को सरलता से लेता है,
तेरे साथ कोई हो या न हो,
फैसले भी तू विनम्र होकर लेता है।
मेरी विडंबना तू शायद ही समझ पाए,
पर मैं निश्चिंत हूँ,
क्योंकि मेरे बचपन के आंगन को,
खिलाये रखने वाले तुम हो,
पुण्य किया है ज़रूर भारी मैन,
जो भाई तू, और भाभी वो है,
भईया तेरे प्यार की कोई सीमा नहीं,
तो भाभी में अपनेपन की मर्यादा नहीं।
भईया मेरी यादें अधूरी है आपके बिना,
मेरा बचपन खाली है तेरे बिना,
और मेरा आज इतना अच्छा ना होता,
आप दोनो के बिना।
💞 भईया - भाभी
चारुलता
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