Wednesday, 1 June 2016

Technology का इस्तेमाल और प्यार क जीवन

कवियों की महफ़िल में
बैठने को मन तो बहुत करता है,
पर क्या करों अभी मेरा एक,
छोटा सा नन्हा सा बच्चा है,
जो हर क्षण माँ मुम्मी माँ करता रहता है,
अभिमान बहुत करती हूँ उसके प्यार पर,
पर दुनिया का क्या,
disturbe होती है हर बात पर,
उसकी किलकारी मेरे जीवन मरुथल
को महकाती है,
लेकिन ये दुनियादारी बहुत अखर जाती है,
खुद के बच्चों से बात करने की
टाइम लिमिट बांधते है,
जो समय ना मिले तो,
गेम्स, मोबाइल उनके जीवन में दे मारते है।
हाँ मैं कुछ अलग करना चाहती हूँ,
मैं आज जैसा नहीं, गुज़रे कल
जैसा जीना चाहती हूँ।
नहीं- नहीं दुनियाँ से दूर नहीं,
लेकिन रिश्तों के करीब,
बड़ों की छाँव में गुज़रना चाहती हूँ,
नयी technology का इस्तेमाल करना,
और प्यार को जीवन बनाना चाहती हूँ,
मेरे बच्चे के जीवन में सच्चे रंग भरना चाहती हूँ।।।

चारुलताजीवन

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